‘‘अभिमन्यु वध’’ का हुआ मंचन, प्रस्तुति अर्घ्य कला समिति ने की

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अर्घ्य प्रेक्षागृह, गॉधी भवन परिसर, श्यामला हिल्स में ‘‘अभिमन्यु वध’’ नाटक खेला गया। अर्घ्य कला समिति ने संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से सहयोग से यह प्रस्तुति दी।

नाटक का कथासार - प्रस्तुति अभिमन्यु वद्ध की कथा महाभारत की विभीषिका को दर्शाती है। दुर्योधन भगवान कृष्ण और बलराम की बहन सुभद्रा के साथ अपने पुत्र लक्ष्मण का संबंध करने का प्रस्ताव लेकर बलराम के पास आते हैं जिसे बलराम स्वीकार कर लेते हैं और कृष्ण क्यूंकि जानते हैं कि सुभद्रा को अर्जुन अच्छे लगते हैं तब कृष्ण सुभद्रा और अर्जुन को भालका तीर्थ दर्शन के बहाने भगा देते हैं। सुभद्रा और अर्जुन का विवाह हो जाता है। सुभद्रा अर्जुन से विनय करती हैं की उन्हें कोई ऐसा युद्ध कौशल सिखाएँ जिसे अर्जुन के अतिरिक्त अन्य कोई ना जानता हो। काफी सोच विचारने के बाद अर्जुन उन्हें चक्रव्यूह का भेदन कैसे होता है यह समझाते हैं। सुनते-सुनते सुभद्रा सो जाती है और उनके गर्भ में अभिमन्यु भी। समय बीतता है गांधार नरेश शकुनि चाल चलते हैं और युधिष्ठर पूरी संपत्ति सहित द्रोपदी सहित सब हार जाते हैं। इस दुर्भाग्य से महान युद्ध जन्म लेता है। जिसे रोकने भगवान कृष्ण पाण्डवों का संदेश लेकर जाते हैं और अपने पक्ष के लिए केवल पाँच ग्राम माँग लेते हैं पर दुर्योधन क्रोधित हो उन्हें जंजीरों से जकड़ने का प्रयास करता है। जिस महान युद्ध को रोकने भगवान आए थे अब वह इस कृत्य से निश्चित हो जाता है। युद्ध आरम्भ होता है कौरव अर्जुन को जकड़ने के लिए चक्रव्यूह का निर्माण करते हैं। अर्जुन इससे भिन्न युद्ध के दूसरे कोने में युद्ध कर रहे हैं। युधिष्ठर चिंता से भरे हैं तभी अभिमन्यु कहते हैं ‘‘कि वह चक्रव्यूह भेदना चाहते हैं’’ वू पूरी कथा युधिष्ठर को बताते हैं कि वह माँ के गर्भ में थे जब पिता ने चक्रव्यूह भेदन सुनाया था। वे जाते हैं चक्रव्यूह भेद कर अंदर चले जाते हैं पर बाहर आना नहीं जानते और अंदर सात महारथी बाले अभिमन्यु को घेर लेते हैं, अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त होते हैं।

 

मंच पर

द्रोण                 -      प्रथम भार्गव

अर्जुन                -      अंकित तिवारी

सुभद्रा                -      अनन्या शर्मा

कृष्ण                -      हर्ष राव

बलराम               -      विनय मीणा

बालक अभिमन्यु         -      अंश अंकिल

अभिमन्यु             -      युवराज गौरव सक्सैना

द्रोपदी                -      मेनका लखेरा

शकुनी               -      सौरभ सोनी

दुर्योधन              -      कृष्णा बिंधानी

भीष्म                -      विनय मीणा

पाण्डव               -      प्रबल प्रजापति, अनन्या वर्मा, नीलेश लखेरा, बसंत पाटस्कर

कौरव                     -      युवराज गौरव सक्सैना, शुवराज गौरव सक्सैना, प्रियांशु ओझा, निमित्त गोयल, अमृत कौर

बालक अभिमन्यु      -      राजवीर सिंह, किंजल लखेरा, विवेक ठाकुर, कशक अंकिल

साथ के मित्र

चक्रव्यूह              -      कशिश अंकिल, कशक अंकिल, किंजल लखेरा, अनुज केवट

                                                            श्रेयांश विश्वकर्मा, प्राची अंकिल, कुलदीप सिंह, ओम पटवा

सुभद्रा की सहेलियाँ      -      हनी भार्गव, पायल अंकिल, परी जैन, अमृत कौर

कृष्ण का दूत          -      चांदनी पाटस्कर

मंच परे

मंच व्यवस्थापक                   -      रत्नेश भार्गव

मंच उपकरण                       -      कृष्णा बिंधानी लोहार

वस्त्र विन्यास                       -      हर्ष राव

रूप विन्यास                       -      हनी भार्गव/परमजीत कौर

मुकुट                                -      प्रेम गुप्ता

अंग आभूषण                     -      अंकित तिवारी

तालवाद्य                           -      वनमाली बिंधानी

संगीत परिकल्पना      

सहायक निर्देशन                -      सुश्रुत गुप्ता

आलेख                             -      सुश्रुत गुप्ता

प्रकाश                              -      प्रेम गुप्ता

कोरियोग्राफी                     -      वैशाली गुप्ता


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