आदिवासी कर्मचारी नेता की बेटी ने लगाया हत्या का आरोप, मामला रेडक्रॉस सिद्धांत अस्पताल भोपाल का

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# केवल कृष्ण त्रिपाठी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंत्रालय कर्मचारी संघ एवं आदिवासी नेता महासिंह मरावी 2 जुलाई 2022 को रेड क्रॉस सिद्धांता अस्पताल में हार्ट की समस्या होने पर भर्ती किए गए। जहां उनका इलाज किया जा रहा था। आज उनके निधन होने की खबर आई है। स्वर्गीय श्री मरावी की बेटी चंदा मरावी ने अपने पिता की मौत को हत्या बताते हुए लॉयन न्यूज़ को बताया कि उनके पिता का इलाज सही नहीं किया गया। उनके पिता की सर्जरी होनी थी। वीपी भी ठीक था। बेटी चंदा मरावी ने सेकंड ओपिनियन में अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों से संपर्क किया हुआ था। चंदा का आरोप है कि उनके पिता के इलाज के लिए अस्पताल ने पहले एक लॉख से अधिक की राशि जमा करा ली और चार लॉख से अधिक का बिल उनको थमा दिया चंदा का आरोप है कि रेड क्रॉस सिद्धांता अस्पताल ने उनके पिता का इलाज ठीक तरीके से नहीं किया। आरोप यह भी है कि रेड क्रॉस सिद्धांता अस्पताल उनके पिता की मौत के बाद शव उनको नहीं दे रहा है। पिता का अंतिम संस्कार मंडला में होना है। 

         सुबह से ही रेड क्रॉस सिद्धांता अस्पताल के सामने कर्मचारी नेता के समर्थक कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे है। वही रेड क्रॉस सिद्धांता अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुबोध वार्ष्णेय ने लॉयन न्यूज़ को बताया कि श्री मरावी को हार्ट-अटैक आया था। जिसमें उनके हॉट में मसल्स फट गई थी। डॉ सुबोध वार्ष्णेय कहते हैं कि हर बात मरावी परिवार और मंत्रालय के उनके परिचित उनके स्टाफ और अधिकारियों को बता दी जाती थी और डॉ. सुबोध वार्ष्णेय ने सर्जरी नहीं होने का कारण बताया कि टाकों की पकड़ नहीं बन पाने के कारण सर्जरी संभव नहीं थी। हॉट की मसल्स की मौत हो गई जिसके चलते राइट और लेफ्ट चेंबर आपस में मिल गए।  ऐसी स्थिति में सर्जरी तीन से चार हफ्ते बाद होती है डॉ. सुबोध वार्ष्णेय कहते हैं कि हर बात उनके परिजनों को बता दी जाती थी। डॉ. सुबोध वार्ष्णेय ने लॉयन न्यूज़ को बताया कि इलाज में आने वाले खर्च की जानकारी उनके परिवार को थी। जिसके प्रमाण उनके पास भी हैं। मरावी परिवार पहले से ही मंत्रालय में खर्च का स्टीमेट ले जाकर जमा करा चुका था और डॉक्टर सुबोध कहते हैं कि हमने परिवार को शव देने से कभी इंकार ही नहीं किया। वह शव ले जा सकते हैं। 


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