ऐ वतन तेरी ज़मीं को मेरा सौ बार नमन... बहरे तूफ़ां मे मेरी नाव है पतवार है तू

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मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा ज़िलेवार गतिविधि "सिलसिला" के अंतर्गत सतना में "साहित्यिक गोष्ठी" आयोजित।
देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर  अमृत महोत्सव के अंतर्गत मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में संभागीय मुख्यालयों पर नवोदित रचनाकारों पर आधारित "तलाशे जौहर" कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद अब ज़िला मुख्यालयों पर स्थापित एवं वरिष्ठ रचनाकारों के लिए "सिलसिला" के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस कड़ी का आठवाँ कार्यक्रम केसरवानी सेवा सदन, सतना में 4 सितंबर 2022 को दोपहर 3:00 बजे "शेरी व अदबी नशिस्त" का आयोजन ज़िला समन्वयक अम्बिका प्रसाद पाण्डेय के सहयोग से किया गया। 
अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी के अनुसार उर्दू अकादमी द्वारा अपने ज़िला समन्वयकों के माध्यम से प्रदेश के सभी ज़िलों में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत "सिलसिला" के अन्तर्गत व्याख्यान, विमर्श व काव्य गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं। ज़िला मुख्यालयों पर आयोजित होने वाली गोष्ठियों में सम्बंधित ज़िलों के अन्तर्गत आने वाले गाँवों, तहसीलों, बस्तियों इत्यादि के ऐसे रचनाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है जिन्हें अभी तक अकादमी के कार्यक्रमों में प्रस्तुति का अवसर नहीं मिला है अथवा कम मिला है। इस सिलसिले के सात कार्यक्रम भोपाल, खण्डवा, विदिशा, धार, शाजापुर  टीकमगढ़ एवं सागर में आयोजित हो चुके हैं और आज यह कार्यक्रम सतना में आयोजित हो रहा है जिसमें सतना, रीवा एवं सीधी के रचनाकार अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। 
सतना ज़िले के समन्वयक अम्बिका प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि सतना में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में 20 शायरों और साहित्यकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर रफ़ीक़ रीवानी ने की, मुख्य अतिथि के रूप में मोहम्मद हाशिम एवं विशेष अतिथि के रूप में डॉ. रामकिशोर चौरसिया मंच पर उपस्थित रहे। 
 
इस प्रकार हैं जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर
रफ़ीक़ रीवानी रीवा,
तुम अपनी बुलंदी पे न इतराओ, कि हम-लोग
बुनियाद के पत्थर हैं दिखाई नहीं देते
मोहम्मद हाशिम सतना,
आदमी मौत से नहीं शायद
आदमी ज़िंदगी से डरता है।
जाम रीवानी रीवा,
ग़ुंचों का गुल है महका हुआ गुलजार है तू,
राहते जां है सुकुं चैन मेरा प्यार है तू
ऐ वतन तेरी ज़मीं को मेरा सौ बार नमन
बहरे तूफ़ां मे मेरी नाव है पतवार है तू
अब्दुल गफ्फ़ार सतना,
जो दिल में दर्द मगर होठों पे मुस्कान रखते हैं
यक़ीनन वो लोग ज़िंदादिली की आन रखते हैं
 मो० सलीम रज़ा रीवा,
मेरा मज़हब यही सिखाता है
सारी दुनिया से मेरा नाता है।
साहिर रीवानी
मेरा प्यारा वतन ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद
खूबसूरत चमन ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद
डॉ. राम स्वरूप द्विवेदी रीवा,
कविता का मौसम आनन्द भरा होता है
कविता के वन में मधुमास सदा होता है।
सलाम सतनवी सतना,
सलाम इस जहाँ में नहीं कोई अपना
हर इंसा की बदली हुई अब नज़र है
वसीउल्ला खान नागौद,
क्यों मेरे हुस्न के हासिर है ज़माने वाले
क्यों मेरे दीद के दीवाने हैं जमाने वाले।
सरोज सिंह "सूरज" नागौद,
तू ही रब है मेरा सज़दे में झुका है ये सर
सर कहीं और बता मैं ये झुकाऊँ कैसे
दीपक शर्मा "दीप" नागौद,
हज़ारों ख़्वाब मरते हैं तो इक मिसरा निकलता है
ज़रा सोचो ग़ज़ल कितने जनाज़ों की कमाई है ।
तामेश्वर शुक्ल "तारक" सतना,
वतन पर आँच गर आये तो चुप रहना नही तारक,
उठा बन्दूक दुश्मन पर चलाना भी जरूरी है
ज़िया अहमद राज़ सतना,
किसको तलाशने चढ़ा आसमान पर
वो तो खड़ा है देख  तेरे सायबान पर
अवध बिहारी पाण्डेय रीवा
मतलबी ये बड़ा जमाना है
हर कोई भीड़ में बेगाना है।
शेरी नशिस्त का संचालन अम्बिका प्रसाद पाण्डेय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सलीम रज़ा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
 
 


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