देश में बढ़ी कड़कनाथ मुर्गे की मांग, पेंडिंग हैं 10 हजार ऑर्डर

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मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भीषण सर्दी पड़ रही है। प्रदेश के कड़कनाथ मुर्गों की मांग जबरदस्त बढ़ गई है। खासकर, ग्वालियर अंचल में ठंड से लोगों की हालत खराब है। कड़कनाथ मुर्गों की मांग जबरदस्त बढ़ गई है। ग्वालियर के केंद्र से कड़कनाथ राजस्थान, यूपी जैसे कई राज्यों में सप्लाइ किया जाता है। वतर््मान में ग्वालियर केंद्र में कड़कनाथ के दस हजार ऑर्डर पेंडिंग हैं। वैसे तो कड़कनाथ प्रदेश के अलीराजपुर और झाबुआ में पाया जाता है। लेकिन, इसकी लोकप्रियता देख सरकार ने ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र में एक अलग फार्म तैयार किया। इस फार्म में कड़कनाथ की अलग से कृत्रिम फार्मिंग की जाती है।  इस फार्म में कड़कनाथ के अंडों के जरिये इनके चूजों को तैयार किया जाता है. वर्तमान में इन चूजों की वेटिंग दस हजार हो गई है. यह एक दुर्लभ मुर्गे की प्रजाति है. यह काले रंग का मुर्गा होता है जो दूसरी मुर्गा प्रजातियों से ज्यादा स्वादिष्ट, पौष्टिक, सेहतमंद और कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है.जहां कड़कनाथ में 25 प्रतिशत प्रोटीन है, वहीं बाकी मुर्गों में 18-20 फीसदी प्रोटीन ही पाया जाता है. देश में कड़कनाथ चिकन के दीवाने लगातार बढ़ रहे हैं. झारखंड में भी इसकी खासी मांग है, इसी को देखते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान धोनी ने इसको अपने फार्म हाउस में पालने की योजना पर काम शुरू किया. इसने कड़कनाथ को और सुर्खियों में ला दिया. एक वक्त था जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कड़कनाथ पर अधिकार को लेकर लड़ाई चल रही थी. लेकिन मध्य प्रदेश ने इस मुर्गे की भौगोलिक पहचान से जुड़ा टैग हासिल कर लिया है. यह राज्य के पश्चिमी हिस्से के झाबुआ जिले में पाया जाने वाला मुर्गा है. वहीं, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ भी काफी वक्त से इस पर दावा करता आ रहा है.


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